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Showing posts from February, 2024

बहादुर शाह ज़फ़र

 बहादुर शाह ज़फ़र के आखिरी दिन क़ैद, देश निकाले और गुमनामी की ज़िंदगी में गुज़रे। 1857 के सितम्बर में, जब अंग्रेज़ों ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया, तो 82 साल के बुज़ुर्ग बादशाह हुमायूं के मकबरे में पनाह लेने के लिए मजबूर हुए। मगर उन्हें पकड़ लिया गया और उनकी बेगम को हवेली में क़ैद कर दिया गया। वहां उन्हें अपने अंग्रेज़ क़ैदियों से बेइज़्ज़ती और बेरुखी* का सामना करना पड़ा।  मशहूर इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने अपनी किताब "द लास्ट मुग़ल" में इस दौर को बादशाह के लिए "बेपनाह दुःख" का ज़माना बताया है। उन्हें अपनी आंखों से अपने बेटों - मिर्जा मुगल, मिर्जा खिज्र सुल्तान और पोते मिर्जा अबू बख़्त की बेरहमी से क़त्ल होते हुए देखना पड़ा, जिन्हें ब्रिटिश अफसर मेजर विलियम हॉडसन ने अंजाम दिया था। 1858 में उन्हें रंगून (आज का यांगून, म्यांमार)  भेज दिया गया, जहां उनकी ज़िंदगी क़ैद और तंगहाली में कटी। इतिहासकार माइकल एडवर्ड्स अपनी किताब "ए हिस्ट्री ऑफ इंडिया" में लिखते हैं कि बादशाह के साथ "पूर्व-सम्राट की तरह नहीं बल्कि एक सियासी क़ैदी" जैसा सलूक किया गया। उन्हें क...

शाहजहां ने नहीं कटवाए थे 20,000 कारीगरों के हाथ, जानिए ऐसी कुछ और अफवाहों का सच

शाहजहां ने नहीं कटवाए थे 20,000 कारीगरों के हाथ, जानिए ऐसी कुछ और अफवाहों का सच दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताज महल भारत की शान है। मुमताज महल की याद में बनवाई गई यह खूबसूरत इमारत भारत के इतिहास का बेजोड़ नमूना है। लेकिन प्यार के इस वजूद के बारे में कई मिथक ऐसे हैं जिन पर आज तक हम आंख बंद कर के भरोसा करते आए हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे तथ्यों से रू-ब-रू करवाएंगे जिन्हें जानकर पहली बार में तो आपको हम पर यकीन नहीं करेंगे लेकिन फिर भी ये तथ्य सत्य हैं और पुख्ता हैं। मिथक- ताज महल को बनाने से रोक रहे थे भूत और जिन्न सत्य- ASI के अधिकारियों के मुताबिक, भूतों को जिन्न द्वारा ताज महल की नींव को ध्वस्त करने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। लिहाजा, इस बात पर यकीन करना कि भूतों ने ताजमहल बनवाने में रुकावट पैदा की थी, गलत है। मिथक- चांदनी रात में चमकता है ताज महल सत्य- ताज महल में दुनिया भर के 28 पत्थर लगे हैं। कई पत्थर ऐसे हैं जो चांदनी रात में चमकते हैं। शरद पूर्णिमा के दौरान इन पत्थरों के चमकने से पूरा ताज महल रोशन हो जाता है और यह बेहद खूबसूरत लगने लग जाता है। मिथक- ताज महल में मुमताज की ममी दफन है ...

मुगल बादशाह जहांगीर

दुनिया के सबसे बड़े सिक्कों में शुमार एक हज़ार तौला का ये सिक्का जो की एक हज़ार मोहर के बराबर था, 1613 में ये सिक्का मुगल बादशाह जहांगीर के दौर में दारुल ख़िलाफ़त आगरा मिंट में ढाला गया था जगांहीर का दौर भारतीय इतिहास का स्वर्ण दौर कहा जाता है यानी भारत को सोने की चिड़िया इसी दौर में कहते थे। #muslimah #Muslims #historyfacts  

खेल में रिकॉर्ड

  क्रिकेट के खेल में रिकॉर्ड तो कई बने हैं लेकिन गेंदबाजी में ऐसा रिकॉर्ड पहली बार बना है. मलेशिया के सिराजुल इदरीस ने टी20 में 7 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. उन्होंने ये कारनामा अंजाम दिया चीन के खिलाफ. कुवालालमपुर में खेले गए इस मैच में सिराजुल ने मात्र 8 रन देकर 7 विकेट हासिल किए. इंटरनेशनल टी20 में ये पहला मौका है जब किसी बॉलर 7 विकेट हासिल किए हैं. वैसे कमाल की बात यह रही कि इदरीस ने ये सभी विकेट क्लीन बोल्ड कर के लिए. इदरीस के घातक गेंदबाजी के कारण चीन की पूरी टीम सिर्फ 23 रन पर ढेर हो गई #historytour #history #cricket

सुलतान अलाउद्दीन ख़िलजी

  तारीख़ में सिकंदर ए सानी कहे जाने वाले सुलतान अलाउद्दीन ख़िलजी जिन्होंने अपने दौर की सुपर पॉवर और सबसे बर्बर क़ौम मंगोलो से हिंदोस्तान की सरहदो की हिफ़ाज़त की। अलाउद्दीन ख़िलजी ने एक बार नहीं कई बार मंगोल फौज को मैदान ए जंग में शिकस्त दी थी। हज़ारों मंगोलों के सर क़लम करके एक किले की नींव में भरवा दिये थे, उस क़िले का नाम पड़ा "क़िला ए सिरी" मंगोल हिंदुस्तान में तभी दाखिल हो सके थे जब उन्होंने इस्लाम कुबूल किया। जहां उन्हे एक नए गांव "मंगोलपुरी" में बसाया गया जो की आज भी दिल्ली में मौजूद है। अगर तारीख़ में अलाउद्दीन नहीं होते तो यहां का भूगोल और इतिहास कुछ और ही होता। #historyfacts #Muslims #history #muslimah

मौलाना अबुल कलाम आजाद रहमतुल्लाह अलयही

 22 फरवरी यौमे वफात आज़ाद द लीडर - मौलाना अबुल कलाम आजाद रहमतुल्लाह अलयही वो दिल्ली के एक बड़े पीर के बेटा थे। तसव्वुफ़ के बड़े आलिम थे; जिनकी क़दर तुर्की का सुल्तान यानी मुसलमानो ख़लीफ़ा भी किया करते थे। 1857 के क़त्ल ओ ग़ारत के बाद वो इस्तांबुल गए, फिर वहाँ से हेजाज़ गए, वहीं शादी की और वहीं पर ग़ुलाम मोहिउद्दीन अहमद का मक्का में 1888 में जन्म हुआ। दो साल बाद ये लोग कलकत्ता यानी भारत की राजधानी आ गए। कलकत्ता में ग़ुलाम मोहिउद्दीन को पढ़ाने का बेड़ा ख़ुद उनके वालिद ने उठाया। फिर उन्हें पढ़ाने के लिए मौलवी मुहम्मद याक़ूब (र.अ.), मौलवी नज़ीरउल हसन (र.अ.) , रंजूर अज़ीमाबादी मौलवी मुहम्मद इब्राहीम, मौलाना सआदत हुसैन क़ाबिल, मौलवी मुहम्मद उमर और शौक़ नीमवी (र.अ.)जैसे बड़े स्कॉलर घर पर बुलाये गए। ग़ुलाम मोहिउद्दीन ने अरबी के साथ उर्दू, हिंदी, इंगलिश और बंगला सीखा।  उन्होंने 12 साल की उमर में अल मिसबाह नाम के अख़बार का इडिटर बन कर जो काम किया, उससे भारत के बड़े बड़े स्कॉलर हैरतज़दा थे। उन्होंने सैंकड़ों लेख लिखे। तख़ल्लुस यानी पेननेम “आज़ाद” रखा। ये ग़ुलाम मोहिउद्दीन अहमद कोई और नही...

लखनऊ

 नवाबों का शहर लखनऊ 1862 में कुछ इस तरह दिखता था।
 बाबर की बेटी की कहानी जिसने ठुकराए थे ऑटोमन सुल्तान के शाही फरमान ये कहानी सन 1576 की है जब हिंदुस्तान की सरज़मीं पर मुग़लिया सल्तनत का परचम लहरा रहा था और अरब दुनिया पर ऑटोमन साम्राज्य का राज था. हिंदुस्तान में अकबर शहंशाह थे तो ऑटोमन साम्राज्य का ताज़ सुल्तान मुराद अली के सिर पर था. इसी दौर में मुग़लिया सल्तनत की एक राजकुमारी ने मक्का-मदीना की अभूतपूर्व यात्रा की. मुग़लकालीन भारत में ये पहला मौका था जब कोई महिला पवित्र हज यात्रा पर गयी. हज को इस्लाम के पांच आधार स्तंभों में से एक माना जाता है. ये मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर की बेटी गुलबदन बेगम की कहानी है जिन्होंने 53 साल की उम्र में फतेहपुर सीकरी की आरामदायक दुनिया छोड़कर एक ऐसी यात्रा पर जाने का फ़ैसला किया जो अगले छह सालों तक जारी रही. गुलबदन बेगम इस यात्रा पर अकेले ही नहीं गईं बल्कि उन्होंने अपने साथ जाने वाली शाही महिलाओं के एक छोटे से समूह का नेतृत्व भी किया. लेकिन अपने आप में शानदार रही इस यात्रा से जुड़े ब्योरे रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं. इतिहासकार मानते हैं कि शायद इसकी एक वजह ये रही हो कि दरबार के पुरुष इतिहासकार...
 अगर डेफ़िनिशन के लिहाज़ से देखा जाए तो भारत एक कामयाब जम्हुरियत है, ये कोई नाकामयाब डेमोक्रेसी नहीं है। क्यूँकि इस मुल्क की अक्सरियत जो चाहती है वो आज़ादी से करती है लिहाज़ा ये जमहूरियत की जीत है! हार नहीं। आपको किसी भी लिबरल के बेहकावे में आने की ज़रूरत नहीं है…
 जब आप क़दीम रोम की तारीख़ पढ़ते हैं तो पाते हैं कि क़दीम रूमी सल्तनत ने फ़ौजी तौर पर मुल्कों पर क़ब्ज़ा नहीं किया था, बल्कि उसने वहाँ पर ऐसे हुक्मरानों को मुक़र्रर करके क़ब्ज़ा किया जो सियासी, फ़ौजी और आर्थिक पर रोम के ताबिअ या अधीन थे। जबकि हिफ़ाज़त के लिए वहाँ पर छोटे छोटे मिलिट्री पोस्ट के साथ साथ सैन्य अड्डे क़ायम किये जिस तरीक़े से अमेरिका ने दूसरे मुल्कों में बेस क़ायम किये हैं। उन इलाक़ों से हासिल होने वाली आमदनी या कमाई का एक हिस्सा उन्हीं हुकमरानों को दिया जाता था और यही पैटर्न आज भी देखने को मिलता है।  आज भी जब सीनियर अमेरिकी इंटेलिजेंस अफ़सर रिटायर होते हैं तो वो अपनी मुद्दत मुलाज़मत के बारे में तास्सुरात लिखने में कोई भी शर्मिंदगी महसूस नहीं करते, इससे बहुत से आलमी लीडर्स खुसूसी तौर पर आलमे इस्लाम के हुक्मरान बेनक़ाब होते हैं। मसलन जब आप एक किताब गेम औफ़ नेशंस को पढ़ते हैं जिसका लेखक एक रिटायर अमेरिकी इंटेलिजेंस आफ़िसर है, हमें ये बताता है कि अमेरिका ही मौजूदा वक़्त के हुकमरानो और बादशाहों प्लांट करता है, आज भी यही सूरतें हाल है।

औरत की फितरत

 टेढी पसली 🙈 औरत से मोहब्बत में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...ये औरत की फितरत में ही नहीं है...  अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी...अगर आप बहुत posassive हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी... अगर आप बहुत ज्यादा सॉफ्ट हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी... अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी ... अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है...  यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो मुतमईन नहीं हो सकती... ये उसकी फितरत है... वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही न हो, बन ही न सकता हो... ठीक वैसे ही जैसे कपड़े खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ, इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ... कपड़े का गट्ठर लगा देती है...  बड़ी मेहनत के बाद एक पसंद आ भी गया, तो भी मुतमईन नहीं हो सकती...आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता... इन सबके बावजूद औरत बड़ी नायाब भी है औरत के अंदर बड़ी खूबी छुपी है,  एक बार उस...

Things to do before Ramadan:

• Forgiveness from Allah.  • Get into the routine of daily Qur'an. • Get yourself Ramadan guide ( link in 1st comment) • Write your Ramadan goals. • Increase in the night prayer. • Plan your charity donations. • Limit social media usage.                                   #MotivationsByMydiary 

Alhamdulillah for everything. ♡︎

 Everything that happens to us is always for our own benefit. Allah is always in charge of everything and We shouldn't be afraid what's going to happen in the Future. This duniya is only a test place. The Real life starts in the Akhirah. May we All pass this Test and go to our real homes in Jannah! Insha’Allah.                             #MotivationsByMydiary

आजकल का हाले मोहब्बत!

अटैचमेंट सबको हो जाती है      किसी के गुड मॉर्निंग के मैसेज से... किसी के सिर्फ यह पूछने से.. क्या तुम ठीक हो ? वगैरह वगैरह..  रोज़ बातें होने लगती है, मसाइल बांटे जाते हैं, भूख, प्यास, सेहत, तबीयत तंदुरुस्ती वगैरा की फिक्र होने लगती है...... शुरू शुरू में बहुत अच्छा फील होता है ..... बड़ा मज़ा आता है.... दिन में जागते ख़्वाब दिखते हैं... कुछ अलग ही सुरुद व सुरूर होता है.... पलपल चेहरे पर मुस्कुराहट बिखरती है..... और...... फिर......  कुछ दिनों बाद आहिस्ता आहिस्ता शौक , दिलचस्पी कम पड़ जाते हैं.... गिले शिकवे बढ़ जाते हैं... बात की जगह लड़ाइयां और इल्ज़ाम तराशियां शुरू हो जाती हैं...  यह पूछने का कि तुम ऑफलाइन क्यों थी? तुम ठीक हो या नहीं हो ? फिक्र व केअर करना कम हो जाता है। वक्त आगे बढ़ता है तो लोग भी बढ़ जाते हैं.........  वह पहले से ज्यादा मैच्योर हो जाते हैं... राब्ते घटा देते हैं......  एक दिन.....!!!  उस इंसान की कन्वर्सेशन भी...... आपकी चैट लिस्ट खारिज हो जाती है।😢  मसला पता है  क्या है ? बेज़ारियत क्यों होती है ? क्योंकि आप एक दूसर...

क़ुरआन

 हाफ़िज़े क़ुरआन के लिए पांच स्पेशल रब्बानी नवाज़िश! 1. सिफारिश  : क़ुरआन अपने पढ़ने वालों के लिए क़यामत के दिन सिफारिशी बन कर आएगा। [मुस्लिम] 2. रफ़अत : पढ़ता जा और (जन्नत के एक एक) दर्जे चढ़ता जा, तेरा आखिरी ठिकाना वहीं है जहां आखिरी आयत पर तु पहुंचे। [رواه أبو داود والترمذي وأحمد] 3. सोहबत : क़ुरआन मजीद का माहिर , कुरान लिखने वाले इंतहाई मुअज़्ज़ज़ और अल्लाह तआला के फरमाबरदार फरिश्तों के साथ होगा। (मुत्तफ़क़ अलैहि) 4. ख़ैरियत : तुम में सबसे बेहतरीन वह है जो क़ुरआन सीखे और सिखाए। (بخاري) 5. अहलियत : क़ुरआन वाले , अल्लाह वाले और अल्लाह के खास लोग हैं। (سنن ابن ماجہ)

अच्छी बात और आदत

 ज़मीन और अहले ज़मीन के दरमियान बिखरी अच्छी बातों और अच्छी आदतों को यूं चुन लिया करो ,जिस तरह परिंदे अपनी ज़िंदगी के लिए रिज़्क़ चुनते हैं

شکر

شکر اس مقام کو کہتے ہیں۔  "جہاں اللہ تعالی کی رضا اور آپکی خواہش ایک ہو جاے" نیک لوگوں سے اللہ تعالی بہت امتحان لیتا ہے پر ساتھ نہیں چھوڑتا اور برے لوگوں کو بہت کچھ دیتا ہے پر ساتھ نہیں دیتا۔۔

दो तरह के लोग

 दुनिया में दो तरह के लोग मिलते हैं, एक वो जो आपकी तारीफ़ के कसीदे पढ़कर, आपको दुनिया की तरफ़ खींचते हैं। और दूसरे वो, जो आपको टोकते हैं या आपकी खा़मी निकालकर आपको सुधारने की कोशिश करते हैं। आपको रब के करीब करने की कोशिश करते हैं। देखने और सोचने में तो लगता है की पहले किस्म के लोग हमारे अपने हैं लेकिन हकी़क़त में दूसरे किस्म के लोग, हमारे अपने होते हैं। बस एक बात याद रखना, दुनिया में तुम्हारे, बस दो अपने हैं, एक तो अल्लाह और दूसरे वो जो तुम्हें अल्लाह के करीब करने की फिक़्र करें। जिनकी फिक़्र तुम्हें, दींन और सुन्नते अहलेबैत अलैहिस्सलाम के करीब लाने की हो। 🖤

زندگی قیمتی ہے

 زندگی بہت قیمتی ہے ...!! اسے ضائع نا کیجیئے گا...! رب سے جُڑ کر ...." عبادت کو تھام کر....؛ اور محبتوں کو بانٹ کر ...." اپنے پیچھے آپ اچھے نقش چھوڑ کر جائیے ...."❤️

You say "why me?"

You! Because Allah wants to erase your sins with every tear that falls from your eyes.Because He wants to add rewards to your Book of Deeds for every time you raise your hands to Him in Dua. Because He wants to raise your ranks in Jannah through every single moment of patience you 'try' to observe even when every part of your soul is screaming in pain. Because He wants to test you with temporary sadness to reward you with permanent bliss. Because Allah loves you ❤️

रिश्ते

एक अरबी ने बहुत खूब लिखा है कि इस साल मैं ने जो सबसे मुश्किल  सबक़ अपनी लाइफ में सीखा , वह यह है कि कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप का रिश्ता कितना ही मज़बूत है , इससे भी फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि आप एक दूसरे को कितने वक़्त से जानते हो, इससे भी फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि आप का रिश्ता , दोस्ती, मोहब्बत कितनी ज़्यादा गहरी या कितनी पुरानी है, इससे भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि आप ने मिलकर कितना कुछ साथ गुज़ारा, साथ मिलकर फेस किया, साथ रह कर साथ दे कर सहारा और सहा, इससे भी फर्क़ नहीं पड़ता कि आप ने उसे कितने इख्लास से यारी, मोहब्बत की, कितना ख्याल रखा, कितना साथ निभाया। "लोगों के दिल पलक झपकते बदल जाते हैं।"

Quran [3:152]

 “Among you are those who desire this world, and among you are those who desire the Hereafter. Then He turned you away from them, to test you.” Quran [3:152] We are always tested by the things we love.

तक़दीर पर राज़ी होना

 कभी भी अपनी जिंदगी के साथ "काश" का रोना ना रोएं। काश ऐसा हो जाता, काश ऐसा नहीं होता। ये काश का लफ्ज़ क़दम क़दम पर आपको ज़हनी सदमा पहुंचाता रहेगा और आपको Mentally Depress कर देगा। अगर आप जे़हनी सुकून चाहते हैं तो तक़दीर पर राज़ी रहने की आदत डालें और हर हाल में काश के बजाए "अल्हम्दुलिल्लाह" कहने की आदत डाल लें। #MotivationsByMydiary

Beauty of relationship

 When you enter into a relationship with someone, remember this, if you do not write the words feeling, honesty and tolerance on the first page of the book of relationship, then separation will become your destiny on the last page.