दुनिया में दो तरह के लोग
मिलते हैं, एक वो जो आपकी तारीफ़ के कसीदे पढ़कर, आपको दुनिया की तरफ़ खींचते हैं। और दूसरे वो, जो आपको टोकते हैं या आपकी खा़मी निकालकर आपको सुधारने की कोशिश करते हैं। आपको रब के करीब करने की कोशिश करते हैं।
देखने और सोचने में तो लगता है की पहले किस्म के लोग हमारे अपने हैं लेकिन हकी़क़त में दूसरे किस्म के लोग, हमारे अपने होते हैं।
बस एक बात याद रखना, दुनिया में तुम्हारे, बस दो अपने हैं, एक तो अल्लाह और दूसरे वो जो तुम्हें अल्लाह के करीब करने की फिक़्र करें। जिनकी फिक़्र तुम्हें, दींन और सुन्नते अहलेबैत अलैहिस्सलाम के करीब लाने की हो। 🖤

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