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شکر

شکر اس مقام کو کہتے ہیں۔ 

"جہاں اللہ تعالی کی رضا اور آپکی خواہش ایک ہو جاے"

نیک لوگوں سے اللہ تعالی بہت امتحان لیتا ہے پر ساتھ نہیں چھوڑتا اور برے لوگوں کو بہت کچھ دیتا ہے پر ساتھ نہیں دیتا۔۔

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सुलतान अलाउद्दीन ख़िलजी

  तारीख़ में सिकंदर ए सानी कहे जाने वाले सुलतान अलाउद्दीन ख़िलजी जिन्होंने अपने दौर की सुपर पॉवर और सबसे बर्बर क़ौम मंगोलो से हिंदोस्तान की सरहदो की हिफ़ाज़त की। अलाउद्दीन ख़िलजी ने एक बार नहीं कई बार मंगोल फौज को मैदान ए जंग में शिकस्त दी थी। हज़ारों मंगोलों के सर क़लम करके एक किले की नींव में भरवा दिये थे, उस क़िले का नाम पड़ा "क़िला ए सिरी" मंगोल हिंदुस्तान में तभी दाखिल हो सके थे जब उन्होंने इस्लाम कुबूल किया। जहां उन्हे एक नए गांव "मंगोलपुरी" में बसाया गया जो की आज भी दिल्ली में मौजूद है। अगर तारीख़ में अलाउद्दीन नहीं होते तो यहां का भूगोल और इतिहास कुछ और ही होता। #historyfacts #Muslims #history #muslimah

मौलाना अबुल कलाम आजाद रहमतुल्लाह अलयही

 22 फरवरी यौमे वफात आज़ाद द लीडर - मौलाना अबुल कलाम आजाद रहमतुल्लाह अलयही वो दिल्ली के एक बड़े पीर के बेटा थे। तसव्वुफ़ के बड़े आलिम थे; जिनकी क़दर तुर्की का सुल्तान यानी मुसलमानो ख़लीफ़ा भी किया करते थे। 1857 के क़त्ल ओ ग़ारत के बाद वो इस्तांबुल गए, फिर वहाँ से हेजाज़ गए, वहीं शादी की और वहीं पर ग़ुलाम मोहिउद्दीन अहमद का मक्का में 1888 में जन्म हुआ। दो साल बाद ये लोग कलकत्ता यानी भारत की राजधानी आ गए। कलकत्ता में ग़ुलाम मोहिउद्दीन को पढ़ाने का बेड़ा ख़ुद उनके वालिद ने उठाया। फिर उन्हें पढ़ाने के लिए मौलवी मुहम्मद याक़ूब (र.अ.), मौलवी नज़ीरउल हसन (र.अ.) , रंजूर अज़ीमाबादी मौलवी मुहम्मद इब्राहीम, मौलाना सआदत हुसैन क़ाबिल, मौलवी मुहम्मद उमर और शौक़ नीमवी (र.अ.)जैसे बड़े स्कॉलर घर पर बुलाये गए। ग़ुलाम मोहिउद्दीन ने अरबी के साथ उर्दू, हिंदी, इंगलिश और बंगला सीखा।  उन्होंने 12 साल की उमर में अल मिसबाह नाम के अख़बार का इडिटर बन कर जो काम किया, उससे भारत के बड़े बड़े स्कॉलर हैरतज़दा थे। उन्होंने सैंकड़ों लेख लिखे। तख़ल्लुस यानी पेननेम “आज़ाद” रखा। ये ग़ुलाम मोहिउद्दीन अहमद कोई और नही...

खेल में रिकॉर्ड

  क्रिकेट के खेल में रिकॉर्ड तो कई बने हैं लेकिन गेंदबाजी में ऐसा रिकॉर्ड पहली बार बना है. मलेशिया के सिराजुल इदरीस ने टी20 में 7 विकेट लेकर इतिहास रच दिया. उन्होंने ये कारनामा अंजाम दिया चीन के खिलाफ. कुवालालमपुर में खेले गए इस मैच में सिराजुल ने मात्र 8 रन देकर 7 विकेट हासिल किए. इंटरनेशनल टी20 में ये पहला मौका है जब किसी बॉलर 7 विकेट हासिल किए हैं. वैसे कमाल की बात यह रही कि इदरीस ने ये सभी विकेट क्लीन बोल्ड कर के लिए. इदरीस के घातक गेंदबाजी के कारण चीन की पूरी टीम सिर्फ 23 रन पर ढेर हो गई #historytour #history #cricket