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 जब आप क़दीम रोम की तारीख़ पढ़ते हैं तो पाते हैं कि क़दीम रूमी सल्तनत ने फ़ौजी तौर पर मुल्कों पर क़ब्ज़ा नहीं किया था, बल्कि उसने वहाँ पर ऐसे हुक्मरानों को मुक़र्रर करके क़ब्ज़ा किया जो सियासी, फ़ौजी और आर्थिक पर रोम के ताबिअ या अधीन थे। जबकि हिफ़ाज़त के लिए वहाँ पर छोटे छोटे मिलिट्री पोस्ट के साथ साथ सैन्य अड्डे क़ायम किये जिस तरीक़े से अमेरिका ने दूसरे मुल्कों में बेस क़ायम किये हैं। उन इलाक़ों से हासिल होने वाली आमदनी या कमाई का एक हिस्सा उन्हीं हुकमरानों को दिया जाता था और यही पैटर्न आज भी देखने को मिलता है। 


आज भी जब सीनियर अमेरिकी इंटेलिजेंस अफ़सर रिटायर होते हैं तो वो अपनी मुद्दत मुलाज़मत के बारे में तास्सुरात लिखने में कोई भी शर्मिंदगी महसूस नहीं करते, इससे बहुत से आलमी लीडर्स खुसूसी तौर पर आलमे इस्लाम के हुक्मरान बेनक़ाब होते हैं। मसलन जब आप एक किताब गेम औफ़ नेशंस को पढ़ते हैं जिसका लेखक एक रिटायर अमेरिकी इंटेलिजेंस आफ़िसर है, हमें ये बताता है कि अमेरिका ही मौजूदा वक़्त के हुकमरानो और बादशाहों प्लांट करता है, आज भी यही सूरतें हाल है।

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