अटैचमेंट सबको हो जाती है
किसी के गुड मॉर्निंग के मैसेज से... किसी के सिर्फ यह पूछने से.. क्या तुम ठीक हो ? वगैरह वगैरह..
रोज़ बातें होने लगती है, मसाइल बांटे जाते हैं, भूख, प्यास, सेहत, तबीयत तंदुरुस्ती वगैरा की फिक्र होने लगती है......
शुरू शुरू में बहुत अच्छा फील होता है ..... बड़ा मज़ा आता है.... दिन में जागते ख़्वाब दिखते हैं... कुछ अलग ही सुरुद व सुरूर होता है.... पलपल चेहरे पर मुस्कुराहट बिखरती है.....
और...... फिर......
कुछ दिनों बाद आहिस्ता आहिस्ता शौक , दिलचस्पी कम पड़ जाते हैं....
गिले शिकवे बढ़ जाते हैं... बात की जगह लड़ाइयां और इल्ज़ाम तराशियां शुरू हो जाती हैं...
यह पूछने का कि तुम ऑफलाइन क्यों थी? तुम ठीक हो या नहीं हो ?
फिक्र व केअर करना कम हो जाता है।
वक्त आगे बढ़ता है तो लोग भी बढ़ जाते हैं.........
वह पहले से ज्यादा मैच्योर हो जाते हैं... राब्ते घटा देते हैं......
एक दिन.....!!!
उस इंसान की कन्वर्सेशन भी...... आपकी चैट लिस्ट खारिज हो जाती है।😢
मसला पता है क्या है ?
बेज़ारियत क्यों होती है ?
क्योंकि आप एक दूसरे को कम वक्त में बहुत ज्यादा और डीप जान लेते हैं... खाने-पीने पहनने घूमने का शौक, सोने जागने की रूटीन से लेकर जिंदगी के दुख दर्द...... सब कुछ......
Each and Everything......🙄
पता है क्या करना चाहिए ?
जब कोई हाथ पकड़ाए तो सिर्फ हाथ पकड़ा करें, पूरा बाज़ू ना खींचा करें।
कोई लाख कहे कि
आप हमें अच्छे लगते हैं ...
अच्छे से शुक्रिया कह कर बात खत्म कर दे, उसकी बात का दिल पर असर मत लिया करें।
लोग आपसे नहीं , उस तजस्सूस (Curiosity) से मुतासिर हो जाते हैं..... जो उन्हें आपको खोजने का होता है, वह आपकी ज़ात में तब तक दिलचस्पी लेते हैं जब तक वह आपको मुकम्मल जान नहीं लेते।
.... सो इसलिए आप खुद को किसी पर भी आश्कार मत करें। राज़ बनकर रहे, जब तक राज़ बनकर रहेंगे.....
तब तक अहम रहेंगे।
जैसे ही लोग आपको मुकम्मल जान लेंगे, वह आपकी कीमत घटा देंगे, आपकी क़द्र करना छोड़ देंगे।
और किसी नई चीज़ की खोज में निकल जाएंगे , यही कड़वा सच है और यहीं आजकल की आम मोहब्बत का हाल है , जो हम लोग कुबूल नहीं कर पाते।
#MotivationsByMydiary

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