तिरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था
आज हम वोमेंस डे के मौके बात कर रहें हैं उन रानियों और शहजादियों की जिन्होंने उस दौर में अपने जौहर दिखाए जिस दौर में औरतों को न कोई रिजर्वेशन मिलता था और न ही बहुत ज़्यादा आजादी। रज़िया सुल्तान, नूरजहां, जहांआरा बेगम से लेकर रानी लक्ष्मी बाई, बेगम हजरत महल और चाँद बीबी तक ने अपने दम पर अपनी तारीख लिखी और खुद की एक अलग पहचान बनाई और साथ ही असरार-उल-हक़ मजाज़ साहेब की इस नज्म को 800 साल पहले हकीकत में तब्दील करके दिखाया जो आज के दौर भी ज़्यादातर औरतों के लिए मुमकिन नहीं है।
#womensday

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